मीडिया में नौकरी करता हु ......सुबह घर से निकल कर जब ऑफिस आता हूँ तो सोच कर आता हूँ के आज शाम को जल्दी घर चला जाऊं गा ... शायद हमारे पेशा कुछ ऐसा है की यह सोचना भी बेकार है ..... पर क्या करें ....किसी बड़ी कंपनी में होते तो हमारा बी ऑफ़ होता घर पर समय देते कम से कम रोज़ घर जाकर माहोल ख़राब तो नही होता .......
और हैं एक आस होती है की रविबार आयेगा तो घरवालों को समय दूंगा पर ऐसा नही हो पता .......फिर वोही होता है ..... जो नही चाहता हूँ .....
कभी किसी को मुक्मल जहान नही मिलता
कहीं ज़मीन तोः कहीं आसमा नही मिलता
तेरे जहान में ऐसा नही की प्यार न हो
जहाँ उम्मीद हो इसकी वहां नही मिलता
Mohalla Live
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Mohalla Live
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गाली-मुक्त सिनेमा में आ पाएगा पूरा समाज?
Posted: 24 Jan 2015 12:35 AM PST
सिनेमा समाज की कहानी कहता है और...
11 years ago


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